मुस्लिम पर्सनल लॉ जागरूकता अभियान की पहली प्रेस कांफ्रेंस

jih press release mplac

प्रेस विज्ञप्ति
नई दिल्ली] 21 – 04 – 2017 । मुस्लिम पर्सनल लॉ पर मीडिया के द्वारा हालिया हमलों के मद्देनज़र जमाअत इस्लामी हिन्द ने अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ जागरूकता अभियान आरंभ करने जा रही है। यह अभियान 23 अप्रैल से 7 मई तक चलेगा। इस पखवाड़े में जमाअत देश के मुसलमानों और अन्य देशवासियों को मुस्लिम पर्सनल लॉ से अवगत कराने का प्रयास करेगी। मुस्लिम पर्सनल लॉ को लेकर जो गलत धारणायें और अज्ञानता है उसको दूर करने का प्रयास करेगी।

आज यहां प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए जमाअत इस्लामी हिन्द के अमीर (अध्यक्ष) मौलाना सैयद जलालुद्दीन उमरी ने कहा कि अधिकांश मुसलमान इस्लामिक पारिवारिक कानून से अनभिज्ञ हैं जिसके कारण अज्ञानतावश उनसे ऐसी गलती हुई है जिससे इस्लाम की छवि बिगड़ गई है। मुस्लिम समाज का बहुसंख्यक हिस्सा इस्लाम की बुनियादी बातों को नहीं जानता है जिसके कारण वे इस्लाम के सिद्धांत को लेकर गंभीर नहीं है। मौलाना उमरी ने कहा कि मुसलमानों की ज़िम्मेदारी है कि वे जीवन के तमाम पहलुओं में अल्लाह और उसके रसूल के आदेशों को दृष्टि में रखें] खासतौर पर पारिवारिक जीवन के बारे में क़ुरआन एवं सुन्नत में जो क़ानून बयान किए गए हैं उन पर अमल करें। इसी बीच उन्होंने कहा कि मीडिया और राजनीतिक गलियारों में मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुद्दे पर बहस और वार्तालाप मुस्लिम समुदाय के असल मुद्दे पर चर्चा से भटकाना है।

मौलाना उमरी ने कहा कि मुस्लिम समाज के सारे सवालों जैसे निकाह] तलाक़] विरासत] महर व नफ़्क़ा और मुस्लिम पर्सनल लॉ से संबंधित अन्य मामलों का जवाब कुरआन में मौजूद है। उन्होंने कहा कि अगर मुसलमान पूरी तरह शरीअत पर चलें तो शरीअत न केवल शान्ति का केंद्र बन सकता है] बल्कि देशबंधु भी इस्लाम के पारिवारिक कानूनों के महत्व] मानव स्वाभाव से उसकी अनूरूपता और मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों से अवगत होकर इससे प्रभावित हो सकते हैं।

मौजूदा हालात का तक़ाज़ा है कि अब हमें पूरी शक्ति के साथ मुस्लिम समाज के सुधार की तरफ ध्यान देना चाहिए। मुस्लिम समुदाय को पारिवारिक जीवन से संबंधित आदेशों और क़ानूनों से अवगत कराना चाहिए। पारिवारिक जीवन में जो बिगाड़ आ रहा है और जो खुला उल्लंघन हो रहा है उनके निवारण का उपाय ढूंढ़ना चाहिए। मुसलमानों को इस बात पर तैयार करने की ज़रूरत है कि वे अपने पारिवारिक विवादों को शरीअत के अनुसार और शरई अदालतों के द्वारा ही फैसला करवायें।

मुस्लिम पर्सनल लॉ जागरूकता अभियान के संयोजक मुहम्मद जाफ़र ने बताया कि अंग्रेज़ों के शासनकाल में मुसलमानों की मांग पर 1937 में शरीअत अप्लीकेशन एक्ट मंजूर किया गया था। इसके अनुसार निकाह] तलाक़] ख़ुलाअ] ज़िहार] मुबारात] फ़स्ख़े निकाह] हक-ए-परवरिश] विलायत] मीरास] वसीयत] हिबा और शुफ़आ से संबंधित मामलों में अगर दोनों पक्ष मुसलमान हों तो पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) की शरीअत के अनुसार उनका फैसला होगा] चाहे उनका रिवाज कुछ हो] साथ ही शरीअत के क़ानून को रिवाज पर प्राथमिकता हासिल होगी। भारतीय संविधान के भाग- 3 (मौलिक अधिकार) में आस्था और धर्म और अंतः-करण की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार माना गया है। यह अनुच्छेद वास्तव में मुस्लिम पर्सनल लॉ की सुरक्षा की गारंटी देता है।

मुहम्मद जाफर ने बताया कि अभियान के दौरान जमाअत का 4&5 करोड़ लोगों तक पहुंचने की योजना है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ चरित्र एवं स्नेह और न्याय और संतुलन का क़ानून है जो वैवाहिक जीवन को खुशिओं से भर देता है] स्वस्थ्य परिवार का सृजन करता है और पवित्र समाज का निर्माण करता है। यह कानून औरतों की मर्यादा] सम्मान और अधिकारों का संरक्षक है] साथ ही उसके स्वाभाविक स्वतंत्रता की भी रक्षा करता है। अभियान के संयोजक मुहम्मद जाफर ने कहा कि वह समान सिविल कोड जैसी अनुचित मांग का समर्थन नहीं करेंगे।

द्वारा जारी
मीडिया प्रभाग, जमाअत इस्लामी हिन्द

One comment

  1. Glad to hear that jih is going to start an awareness campaign. it’ll help to understand the best of personal law ,not only the Muslims but other citizens of india ​also.may God bless Muslims to act according to Islam and bring peace n prosperity in the world particularly in india.

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