मुस्लिम पर्सनल लॉ कुदरत का कानून, न बदलाव किया जा सकता न जरूरत : जमाअत इस्लामी हिन्द करेली

मुस्लिम पर्सनल लॉ कुदरत का कानून, न बदलाव किया जा सकता न जरूरत :  जमाअत इस्लामी हिन्द करेली

जमाअत इस्लामी हिन्द ने मुस्लिम पर्सनल लॉ जागरुकता अभियान की शुरुआत करेली में दीनदयाल परिसर से हुई इस मौके पर मध्यप्रदेश जमात-ए-इस्लामी के मीडिया प्रभारी डॉ.अजहर बेग, करेली शहर के अध्यक्ष श्री जाहिद शेख सचिव श्री मोहम्मद हाजी शरीफ ताज साहब ने मीडिया को संबोधित किया |
इस मौके पर डॉक्टर अजहर बेग ने अभियान का परिचय करवाते हुएबताया कि 23 अप्रैल से शुरू होकर 7 मई तक चलने वाले इस जागरुकता अभियान के जरिए हम पूरे देश में लोगों तक मुस्लिम पर्सनल लॉ की जरूरत ओर हकीकत बताना चाहते हैं
तलाक के बाद महिला के भरण पोषण पर सवाल उठाने के जवाब में श्री बेगने कहा इस्लाम में लड़की का दान नहीं किया जाता बल्कि उसका एक संबंध और बनाया जाता है तलाक हो जाने की स्थिति में उसकी जिम्मेदारी उम्र कम होने पर उसके माता-पिता पर उसी तरह आइदहोती है जिस तरह शादी से पहले थी। ज्यादा उम्र होने पर उसकी जिम्मेदारी उसके बच्चे और फिर आखिर में सरकार पर भी आइद होती है
हलाला पर सवाल के जवाब में श्री बेग साहब ने कहा कि मंसूबा बंद तरीके से किया गया हलाला हराम है और इस्लाम में ऐसे लोगों की तुलना खुले सांड से की है और कहा कि जिन चीजों को हम खुद पसंदीदा नहीं मानते मीडिया बार-बार क्यों उसको इस्लाम के नाम से पेश करता है
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि तीन तलाक तलाक ए बिदअत हैसको इस्लाम में ना पसंदीदा करार दिया है उन्होंने कहा कि समाज को साक्षर करने की जरूरत है
और लोगों में मुस्लिम पर्सनल ला के लिए जागरूकता लाने की जरूरत है
;डॉक्टर साहब ने करेली शहर में मुसलमानों के प्रतिशत में होने वाली तालक पर बात करते हुए कहा आज ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जैसे मुसलमानों को तलाक के अलावा कोई दूसरा काम ही नहीं जबकि हम शहर करेली में ही इसकी यथा स्थिति से अवगत हो सकते हैं
करेली शहर के सचिव मोहम्मद हाजी शरीफ साहब शहर में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कयाम पर रोशनी डालते हुए कहा की अंग्रेज़ों के शासनकाल में मुसलमानों की मांग पर 1937 में शरीअत अप्लीकेशन एक्ट मंजूर किया गया था।उन्होंने कहा कि अगर मुसलमान पूरी तरह शरीअत पर चलें तो शरीअत न केवल शान्ति का केंद्र बन सकता है] बल्कि देशबंधु भी इस्लाम के पारिवारिक कानूनों के महत्व मानव स्वाभाव से उसकी अनूरूपता और मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों से अवगत होकर इससे प्रभावित हो सकते हैं।
इस्लामी शरीयत में बदलाव या जीर्णोद्धार के सवाल पर डॉक्टर अजहर ने कहा कि जिस तरह कुदरत के कामों में प्राचीन काल से लेकर अब तक किसी प्रकार का बदलाव नहीं आया और ना बदलाव की जरूरत महसूस होती उसी तरीके से यह भी अल्लाह का कानून है इस में भी बदलाव ना किया जा सकता और ना इसकी जरूरत है।
शहर के अध्यक्ष श्री शेख जाहिद ने कहा इस जागरुकता अभियान के जरिए हम पूरे करेली में मुस्लिम पर्सनल ला कि तालीमात को आम करेंगे, घर बैठक करेंगे ,चाय पार्टी, कारनरमीटिंग, वकीलों से मुलाकात, शिक्षाविदों के साथ संगोष्ठियों, के जरिए इस्लामिक पारिवारिक कानून की हकीकत से समाज को रोशनाज कराएंगे।
हससान शेख
मीडिया प्रभारी
करेली

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