जमाअत इस्लामी मध्य प्रदेश ने राष्ट्रव्यापी अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ जागरूकता अभियान आरंभ किया

bhopal press release

भोपाल । जमाअत इस्लामी मध्य प्रदेश ने राष्ट्रव्यापी अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ जागरूकता अभियान आरंभ करने जा रही है। यह अभियान 23 अप्रैल से 7 मई तक चलेगा। इस पखवाड़े में जमाअत प्रदेश के मुसलमानों और अन्य देशवासियों को मुस्लिम पर्सनल लॉ से अवगत कराने का प्रयास करेगी। मुस्लिम पर्सनल लॉ को लेकर जो गलत धारणायें और अज्ञानता है उसको दूर करने का प्रयास करेगी।

आज यहां इंडियन काफी हाउस भोपाल में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को जमाअत इस्लामी के केंद्रीय सचिव ओर जागरूकता अभियान के राष्ट्रीय संयोजक श्री मोलाना मो जाफर साहब, प्रांतीय अध्यक्ष जमाअते इस्लामी मध्य प्रदेश डा हामिद बैग साहब, महिला प्रांतीय अध्यक्षा श्री मति महनाज इसमाईल साहिबा ने संबोधित किया ।
मोलाना मो जाफर साहब ने कहा कि अधिकांश मुसलमान इस्लामिक पारिवारिक कानून से अनभिज्ञ हैं जिसके कारण अज्ञानतावश उनसे ऐसी गलती हुई है जिससे इस्लाम की छवि बिगड़ गई है। मुस्लिम समाज का बहुसंख्यक हिस्सा इस्लाम की बुनियादी बातों को नहीं जानता है जिसके कारण वे इस्लाम के सिद्धांत को लेकर गंभीर नहीं है। मौलाना जाफर ने कहा कि मुसलमानों की ज़िम्मेदारी है कि वे जीवन के तमाम पहलुओं में अल्लाह और उसके रसूल के आदेशों को दृष्टि में रखें खासतौर पर पारिवारिक जीवन के बारे में क़ुरआन एवं सुन्नत में जो क़ानून बयान किए गए हैं उन पर अमल करें। इसी बीच उन्होंने कहा कि मीडिया और राजनीतिक गलियारों में मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुद्दे पर बहस और वार्तालाप में समुदाय के असल मुद्दे पर चर्चा से भटक रहे हैं
एक सवाल के जवाब में मौलाना जफर साहब ने कहा कि शरीयत ने तलाक की इजाजत उस वक्त दी हे जब निबाह की कोई सूरत बाकी ना रहे और बीवी से शोहर की नफरत हद से ज्यादा बढ़ जाए तलाक के मानी बंधन खोलने के हैं मानो निकाह के जरिए जो बंधन बांधा गया था वह तलाक के जरिए खोल दिया जाता है इस्लामी शरीयत में हालांकि तलाक की इजाजत दी गई है लेकिन इसे ना पसंदीदा ठहराया गया है

मौलाना जाफर साहब ने कहा कि मुस्लिम समाज के सारे सवालों जैसे निकाह] तलाक़] विरासत] महर व नफ़्क़ा और मुस्लिम पर्सनल लॉ से संबंधित अन्य मामलों का जवाब कुरआन में मौजूद है। उन्होंने कहा कि अगर मुसलमान पूरी तरह शरीअत पर चलें तो शरीअत न केवल शान्ति का केंद्र बन सकता है] बल्कि देशबंधु भी इस्लाम के पारिवारिक कानूनों के महत्व] मानव स्वाभाव से उसकी अनूरूपता और मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों से अवगत होकर इससे प्रभावित हो सकते हैं।
मौलाना जाफर साहब ने तीन तलाक के सवाल के जवाब में कहा कि हम तो एक तलाक के भी होने को पसंद नहीं करते बल्कि शौहर बीवी के रिश्ते को कायम रखने के लिए इस्लाम में जो तरीके बताए हैं उसको फॉलो किया जाए तो तलाक की नौबत भी ना आए ।
मोलाना जाफर ने तीन तलाक को तलाके बिदअत(नापसंदीदा तरीका) बताते हुए कहां की इस तरह के लोगों का बाईकाट किया जाना चाहिये ।
समय की जरूरत है कि अब हमें पूरी ताकत के साथ मुस्लिम समाज के सुधार की तरफ ध्यान देना चाहिए। मुस्लिम समुदाय को पारिवारिक जीवन से संबंधित आदेशों और क़ानूनों से अवगत कराना चाहिए। पारिवारिक जीवन में जो बिगाड़ आ रहा है उनके निवारण का उपाय ढूंढ़ना चाहिए। मुसलमानों को इस बात पर तैयार करने की ज़रूरत है कि वे अपने पारिवारिक विवादों को शरीअत के अनुसार और शरई अदालतों के द्वारा ही फैसला करवायें।
उनहोने दारुल कजा को समझाते हुए कहा कि पारिवारिक विवादों के लिए दारुल कजा का ही इस्तेमाल होना चाहिए इससे कानूनी अदालतो मैं केसेस की तादाद में कमी आएगी और विवादों का निपटारा भी जल्द से जल्द किया जा सकेगा ।
मुहम्मद जाफ़र ने बताया कि अंग्रेज़ों के शासनकाल में मुसलमानों की मांग पर 1937 में शरीअत अप्लीकेशन एक्ट मंजूर किया गया था। इसके अनुसार निकाह] तलाक़] ख़ुलाअ] ज़िहार] मुबारात] फ़स्ख़े निकाह] हक-ए-परवरिश] विलायत] मीरास] वसीयत] हिबा और शुफ़आ से संबंधित मामलों में अगर दोनों पक्ष मुसलमान हों तो पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) की शरीअत के अनुसार उनका फैसला होगा] चाहे उनका रिवाज कुछ हो] साथ ही शरीअत के क़ानून को रिवाज पर प्राथमिकता हासिल होगी। भारतीय संविधान के भाग- 3 (मौलिक अधिकार) में आस्था और धर्म और अंतः-करण की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार माना गया है। यह अनुच्छेद वास्तव में मुस्लिम पर्सनल लॉ की सुरक्षा की गारंटी देता है।
जमाअते इस्लामी मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष श्री डॉ हामिद बैग साहब ने बताया कि अभियान के दौरान जमाअत का 20 लाख लोगों तक पहुंचने की योजना है। इसके लिए मध्यप्रदेश के ज्यादातर छोटे बड़े शहरों में आम जनसभाएं की जाएंगी। घर घर पहुंचकर मुस्लिम महिलाओं एवं पुरुषों को पारिवारिक जीवन का महत्व शरीयत की जरूरत बताई जाएगी। मध्य प्रदेश के 8 बड़े शहरों में प्रेस कान्फ्रेंस प्रेस मीट आयोजित की जाएगी जमाअते इस्लामी मध्य प्रदेश महिला विंग की जिम्मेदार श्री मति महनाज इसमाईल साहिबा ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ चरित्र एवं स्नेह और न्याय और संतुलन का क़ानून है जो वैवाहिक जीवन को खुशिओं से भर देता है] स्वस्थ्य परिवार का सृजन करता है और पवित्र समाज का निर्माण करता है। यह कानून औरतों की मर्यादा] सम्मान और अधिकारों का संरक्षक है] साथ ही उसके स्वाभाविक स्वतंत्रता की भी रक्षा करता है।
अभियान के संयोजक मुहम्मद जाफर ने कहा कि वह समान सिविल कोड जैसी अनुचित मांग का समर्थन नहीं करेंगे।

मीडिया विभाग मध्यप्रदेश

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